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सनसनीखेज खुलासा: ठाणे में ₹6 लाख की ठगी का शिकार हुआ गरीब परिवार, पुलिस और जनप्रतिनिधियों ने मोड़ा मुंह!
31 Aug 2026, 11:23 PM • Vande Bharat Live TV News

मीनाक्षी विजय कुमार भारद्वाज/मुंबई
सनसनीखेज खुलासा: ठाणे में ₹6 लाख की ठगी का शिकार हुआ गरीब परिवार, पुलिस और जनप्रतिनिधियों ने मोड़ा मुंह!
विशेष रिपोर्ट | काशीगांव (मिरा रोड)
मुंबई/महाराष्ट्र: मीरा-भायंदर में ठगी और धोखाधड़ीका शिकार हुआ गरीब परिवार आखिर कौन देगा इंसाफ जब सरकार ही सो रही हो।आर्थिक राजधानी कहे जाने वाली मुंबई मायानगरी में एक तरफ सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और कानून-व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि गरीब और लाचार आम नागरिक को इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। मिरा-भायंदर के काशीगांव क्षेत्र में एक मध्यमवर्गीय परिवार की गाढ़ी कमाई के 6 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार न्याय पाने के लिए स्थानीय नगरसेवक से लेकर पुलिस स्टेशन के चक्कर काट-काटकर थक चुका है, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
10 लाख में दुकान का झांसा, 6 लाख ऐंठकर मुकरा बिल्डर
प्राप्त दस्तावेजों और शिकायत के अनुसार, काशीगांव (डचकुलपाडा) के निवासी अरुण गायेन और उनकी पत्नी सपना गायेन ने एक छोटी सी दुकान (गाला) के जरिए अपना रोजगार शुरू करने का सपना देखा था।
सौदा और झांसा: नवंबर 2022 में बिल्डर सरजु प्रसाद यादव (निवासी: साई कृपा चाल, कुरार विलेज, मालाड ईस्ट) ने मिनाक्षी नगर, काशीगांव में 10×20 वर्ग फीट की दुकान 10 लाख रुपये में देने का वादा किया।
किस्तों में ऐंठे पैसे: पीड़ित परिवार ने अपनी जमा-पूंजी और बैंक चेक/ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से 24 दिसंबर 2022 से 16 जून 2023 के बीच कुल ₹6,00,000 (छह लाख रुपये) आरोपी को दे दिए।
झूठे दिलासे और साजिश: पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी होने पर जब पीड़ित ने आपत्ति जताई, तो आरोपी के परिजनों—हवलदार यादव (बेटा), अभिषेक यादव (पोता) और सोनिया यादव (बेटी)—ने झांसा देकर मामला शांत करा दिया।
कागजी एग्रीमेंट भी निकला बेअसर: 11 दिसंबर 2025 को बाकायदा Memorandum of Understanding (MoU) तैयार किया गया, जिसमें आरोपी ने माना कि उसने 6 लाख रुपये ले लिए हैं और दुकान का कब्जा नहीं दिया है। MoU में पैसा लौटाने या दूसरी दुकान देने का वादा किया गया, लेकिन आज तक न दुकान मिली और न ही एक भी रुपया वापस आया।
नगरसेवक से पुलिस स्टेशन तक: हर जगह से मिली सिर्फ मायूसी
अपनी जीवनभर की कमाई डूबते देख पीड़ित परिवार जब मदद की गुहार लेकर स्थानीय नगरसेवक के पास गया, तो वहां से आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। जब वे काशीगांव पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो वहां भी उनकी लाचारी का मजाक ही बना।
पीड़ित का गंभीर आरोप है कि पुलिस ठोस कार्रवाई करने के बजाय सीधे “कोर्ट जाओ” कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती है। राज्य महिला आयोग में शिकायत (अर्ज क्र. 15/2026) के बाद पुलिस ने कागजी खानापूर्ति के लिए धारा 179 के तहत एक नोटिस/समन (जावक क्र. 90093/2026, दिनांक 20/06/2026) जरूर जारी किया, लेकिन इसके बाद कोई जमीनी जांच या आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
पुलिस की सुस्ती से बुलंद हो रहे ठगों के हौसले
पुलिस और प्रशासन के इस रवैये से जनता के मन में गहरा रोष है:
क्या गरीब होना अपराध है?
पैसे और रसूख वालों के लिए तुरंत हरकत में आने वाली पुलिस एक गरीब और लाचार परिवार के लिए पूरी तरह हाथ-पर-हाथ धरे बैठी है।
पल्ला झाड़ने का रवैया:
एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने के बजाय पीड़ितों को अदालत का लंबा रास्ता दिखा दिया जाता है, जिससे गरीब व्यक्ति कानूनी खर्चों के डर से टूट जाए।
आरोपियों को शह:
पुलिस की इस निष्क्रियता से ठगी करने वाले आरोपी और उसके सहयोगियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई डर नहीं रह गया है।
पीड़ित परिवार की आंखों में आंसू और सवाल
पीड़ित परिवार आज दाने-दाने और इंसाफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। उनका कहना है:
”हमने पाई-पाई जोड़कर दुकान के लिए पैसे दिए थे। आज जब हमारे साथ धोखाधड़ी हुई है, तो न नगरसेवक सुन रहे हैं और न ही पुलिस। क्या गरीबों के लिए कानून अलग है? अगर पुलिस ऐसे ही पल्ला झाड़ती रही तो हम न्याय के लिए कहां जाएं?”
स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और गृह विभाग से मांग की है कि इस मामले में तुरंत धोखाधड़ी (420 व अन्य धाराएं) का मामला दर्ज कर आरोपी बिल्डर व उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार के 6 लाख रुपये वापस दिलवाए जाएं।
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